<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-6686747589815449671</id><updated>2012-03-22T08:08:42.150-07:00</updated><title type='text'>Amit MISHRA says</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6686747589815449671/posts/default'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Amit MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17125511377213831414</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>2</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6686747589815449671.post-6901989700477995981</id><published>2010-04-17T00:28:00.000-07:00</published><updated>2010-04-17T00:30:07.546-07:00</updated><title type='text'>विषय : "शैम्पू के बुलबुले "</title><content type='html'>पिछले सप्ताह हम इंडिया गेट गए थे, दस रूपये में बड़ा अनूठा यन्त्र खरीदा  एक डिबिया में थोडा सा शैम्पू का पानी ले लीजिये , फिर तार का एक लूप मिला है - उसे डुबो-डुबोकर फूंकते रहिये गज़ब के अनगिनत बुलबुले निकलते हैं  मेरी घरवाली कहती है की आप भी बच्चों वाला खिलौना खरीद लाये हैं खैर मैं यन्त्र को लेकर बहुत उत्साहित था   रात को सोया तो स्वप्न देखा कि , हमारे प्रधानमंत्री जी भी यही बुलबुले वाला यन्त्र खरीद रहे हैं  इंडिया गेट से यन्त्र खरीदकर वे सीधे 'लालकिले' चले जाते हैं  ध्वजारोहण के बाद स्वतंत्रता दिवस पर उनका भाषण है  पर यह क्या ? इस बार प्रधानमन्त्री भाषण देने के बदले शैम्पू के बुलबुले उड़ा रहे हैं  हल्की-हल्की धूप निकली है , जो कि बुलबुलों पर पड़कर उन्हें सुन्दर बना रही है  एक बुलबुला गरीबी मिटाने का , दूसरा बेरोज़गारी हटाने , तीसरा विकास के सपने दिखाने का ... और इसी प्रकार चौथे , पांचवें और न जाने कितने खूबसूरत बुलबुले निकल रहे हैं  पर देखने वाली बात यह है कि , इन सारी ख़ूबसूरत योजनाओं रुपी बुलबुले धरातल पर पहुचने के पूर्व ही फुस्स हुए जा रहे हैं  घोषनाओं के साथ बड़ी विडम्बना होती है  वे इस कदर भंगुर होती हैं कि , मंच कि ऊंचाई भी नहीं झेल पातीं और धरातल पर आने तक चकनाचूर हो जाती हैं प्रधानमंत्री के इस बुल-बुला यन्त्र पर संसद में विशेष सत्र बुला लिया जाता है  पक्ष-विपक्ष-निष्पक्ष सभी में गरमा-गर्म बहंस होती है  बहंस का मुद्दा यह नहीं है कि ये बुलबुले हवाई क्यों थे और धरातल पर आने के पूर्व ही क्यों अंतर्धान हो गए ? बल्कि बहंस यह थी कि इन बुलबलों में जो शैम्पू प्रयोग किया गया था , वो मैडम के बालों के धोये हुए शैम्पू का क्यों था ? धन्य है हमारी महान संसद  अमित मिश्र इलाहाबाद .(स्थानीय पता : जी - ००३ , अल्फा-२ , ग्रेटर नॉएडा : 9810366891 )&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6686747589815449671-6901989700477995981?l=hindi-utthan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/feeds/6901989700477995981/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/2010/04/blog-post.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6686747589815449671/posts/default/6901989700477995981'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6686747589815449671/posts/default/6901989700477995981'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/2010/04/blog-post.html' title='विषय : &quot;शैम्पू के बुलबुले &quot;'/><author><name>Amit MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17125511377213831414</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6686747589815449671.post-7015758530583109933</id><published>2009-11-10T06:01:00.000-08:00</published><updated>2009-11-10T06:03:24.148-08:00</updated><title type='text'>"ऑफर"</title><content type='html'>रविवार की सुबह , आँगन में धपाक की आवाज़ के साथ अखबारों का पुलिंदा गिरता है , मानो घर में कोई बन्दर कूदा हो . दर-असल पिछले कुछा दिनों से मैं भी २ अखबार मंगाने लगा  पर मुझे अखबार बाटने वाले की एक हरकत मानसिक क्लेश देती है , वह यह की - हिंदी अखबार को अंग्रेजी वाले में लपेट कर देता है  अंग्रेजी में लिपटी हुयी हिंदी मेरे मन में एक विशेष प्रकार की आरुची पैदा कर देती है  पर शायद ऐसा आज की बर्गरी सभ्यता से मेरा तारतम्य न बन पाने के कारण है   परन्तु मेरी धर्मपत्नी जी ऐसा कुछा नहीं सोचती और वे बिना किसी भाषा विभेद के अखबारों का पुलिंदा परतवार अनावृत करने लगती हैं  और ढूढ़  निकालती हैं की कहाँ कौन सा ऑफर चल रहा है  मेरी बीवी तो बिना ऑफर वाले सामन खरीदने को तो शौपिंग ही नहीं मानती है. नमकीन के साथ कटोरे , मैग्गी के साथ पास्ता और फूल झाडू के साथ सींक झाडू भी न मिले तो किस काम का  और एक मैं हूँ की साइकिल भी खरीदूं तो दुकानदार घंटी के पैसे आलग से ले लेता है.मैं इनको कई बार समझा चुका हूँ की लोअग ऑफर के नाम पर घुमा-फिरा कर पैसे निकलवा ही लेते हैं . वे लोग मामा को मामा न कहलवाकर उनको - " पिताजी के स्वसुर की बेटी का भाई" कहलवाते हैंपर रविवार का दिन ही ऐसा होता है , हर घंटे - २ घंटे में मेरे घार के काले दरवाजे में कोई न कोई , लाल - पीले ऑफर युक्त अखबार खोंस जाता है यही नहीं कुछा ऑफर-दाता तो साक्षात् घंटी बजाकर बाहर बुला लेते हैं , और ऑफर देने की इस कदर जिद करते हैं मानो बस सूर्यदेव प्रकट हुए हों जो की आब कुंती को बिना कुछ दिए जायेंगे ही नहीं  रेडियो , टीवी , मोबाइल और इन्टरनेट सभी मानो बस ऑफर ही प्रचारित करने को आविष्कृत हुए हैं आज के माहौल में ऑफर से बच पाना वैसे ही मुश्किल है जैसे, पूस की ठंड से , जो की सात रजाई ओढ़ने के बाद भी थोडा बहुत लगती ही रहती हैऑफर ने हिन्दुस्तान के जन सामान्य को अंगीकृत किया है. आज यह मंत्रियों और 'एलीट' वर्ग की बपौती नहीं रहे  जहाँ एक ओ़र फ्लाई ओवेर्स से कोठियां निकलती हैं वहीँ कल्लू मिस्त्री को भी बीडी के साथ माचिस की डिब्बी ऑफर में मिलाती है मोबाइल के साथ 'सिम-कार्ड ' फ्री , 'सिम-कार्ड' के साथ टॉक टाइम फ्री , टॉक-टाइम के साथ एस एम् एस फ्री और एस एम् एस के साथ फालतू की बातें फ्री  आज के पंडित जी भी , भागवत कथा के साथ २ सत्यनारायण कथा फ्री का ऑफर देते हैं. इसी तरह हमारे कुछ लेखक बन्धु अपने गद्य लेखन में कविता के अंश चिपकाने से नहीं चूकते  दर-असल ऑफर का सिद्धांत ही कम चलने या न चलने वाली चीजों को सा-शुल्क या निःशुल्क निबटाने पर आधारित है ऑफर ने आज न जाने कितने ही विस्मृत हो चुके  त्योहारों को पुनर्जन्म दिया है. आज ऑफर दिवाली , होली और नव-वर्ष का मोहताज नहीं रहा  ऑफर को अमरत्व का वरदान प्राप्त है  न जाने कितने आखिरी ३ दिन आते हैं और जनता का हुजूम , श्रद्धा सुमन अर्पित करने टूट पड़ता है  मैं समझाता हूँ की अभी और दिन रहेगा , लेकिन मेरी कौन सुनता  है  नया महीना लग चुका है , मोबाइल में 'बीप' आती है - मैं उत्सुकता से मेसेज देखने लग जाता हूँ की सैलरी आयी होगी , परन्तु नहीं , यह सैलरी नहीं - सैलरी से पूर्व उसे सोखने के मेसेज थे  लक्ष्मी जी तो पहले से ही चंचल थीं , कलियुग में और भी व्यस्त हो गयीं हैं  हमारे यहाँ पड़े ,ऑफर से युक्त तमाम पम्पलेट - मेरे यहाँ मुश्किल से आयी लक्ष्मी को ऑफर-दाता के यहाँ ले जाने के आमंत्रण पत्र नजर आते हैं या यों कहें की मेरी लक्ष्मी के सभ्य  अपहरण की साजिश                                                                                                                                  अमित मिश्र   - ९८१०३६६८९१ ( जी-३ , अल्फा-२ , ग्रेटर नॉएडा )&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6686747589815449671-7015758530583109933?l=hindi-utthan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/feeds/7015758530583109933/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/2009/11/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6686747589815449671/posts/default/7015758530583109933'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6686747589815449671/posts/default/7015758530583109933'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindi-utthan.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='&quot;ऑफर&quot;'/><author><name>Amit MISHRA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17125511377213831414</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry></feed>
